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बस्ती में गुंडाराज: ₹2000 देकर कार हड़पना चाहता है दबंग, मना करने पर घर में घुसकर लहराई पिस्तौल!

दहशत में परिवार: 7 मुकदमों के आरोपी 'मुन्ना बाबा' ने दी बोटी-बोटी काटने की धमकी, क्या सो रही है बस्ती पुलिस?

🚨बस्ती: ₹2000 का ‘कर्ज’ और जान पर बन आई आफत, क्या उत्तर प्रदेश में कानून से ऊपर हैं ये ‘मुन्ना बाबा’?🚨

  • मदद बनी मुसीबत: ₹2000 के कर्ज के बदले कार पर कब्जा, विरोध करने पर सरेआम असलहों से दी मौत की चुनौती।
  • खाकी का खौफ खत्म? वीडियो साक्ष्य के बावजूद FIR को तरस रहा पीड़ित, क्या अपराधियों के आगे नतमस्तक है प्रशासन?
  • IGRS की फाइलों में कैद इंसाफ: दर-दर भटक रहा अंबुज का परिवार, दबंगों की पिस्तौल के आगे पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ फेल।

🔥साहब! हत्या का इंतजार है क्या? खुलेआम मिल रही है जान से मारने की धमकी, फिर भी पुलिस नहीं लिख रही मुकदमा।🔥

07 अप्रैल 26, ब्यूरो रिपोर्ट, उत्तर प्रदेश।

 बस्ती ।। उत्तर प्रदेश सरकार जहाँ एक तरफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और अपराधियों के सीने में खौफ का दावा करती है, वहीं बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाना क्षेत्र से आई यह दास्तां व्यवस्था के दावों की हवा निकाल रही है। एक साधारण युवक अंबुज उपाध्याय के लिए ₹2000 की मदद आज उसकी और उसके परिवार की मौत का वारंट बन गई है।

मदद या मौत का जाल?

​मामला किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। प्रार्थी अंबुज उपाध्याय की कार दुर्घटनाग्रस्त हुई, रिपेयरिंग के लिए ₹2000 कम पड़े। जान-पहचान के कृष्ण नंदन उपाध्याय उर्फ ‘मुन्ना बाबा’ ने पैसे दिए। लेकिन ये पैसे मदद नहीं, बल्कि अंबुज की कार हड़पने की एक सोची-समझी साजिश थी। महज दो दिन बाद मुन्ना बाबा ने ₹50,000 में वह कार अपने नाम करने का दबाव बनाया और इनकार करने पर शुरू हुआ गाली-गलौज, धमकी और दहशत का वह सिलसिला, जो आज एक पूरे परिवार को घर में दुबकने पर मजबूर कर चुका है।

बंदूक की नोक पर ‘न्याय’

​शिकायत के अनुसार, मुन्ना बाबा कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि सात मुकदमों का ‘हिस्ट्रीशीटर’ होने का दंभ भरता है। 29 मार्च 2026 को आरोपी ने अपने भाई और गुर्गों के साथ अंबुज के घर पर पिस्तौल लेकर धावा बोल दिया। घर की महिलाओं और बुजुर्गों को अपमानित किया गया और धमकी दी गई कि “अंबुज जहाँ मिलेगा, उसकी बोटी-बोटी काटकर नदी में फेंक देंगे।” ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरी घटना का वीडियो मौजूद है, फिर भी पुलिस प्रशासन मौन साधे बैठा है।

पुलिस की भूमिका: संरक्षण या लाचारी?

​जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर दर्ज शिकायत (संदर्भ संख्या: 40018526011268) स्पष्ट रूप से ‘FIR दर्ज न करना’ श्रेणी में है। सवाल यह उठता है कि:

  • ​क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है?
  • ​क्या एक अपराधी का रसूख इतना बड़ा है कि पीड़ित का वीडियो साक्ष्य भी कम पड़ रहा है?
  • ​क्या गृह एवं गोपन विभाग के अंतर्गत आने वाली पुलिस अब केवल कागजी घोड़े दौड़ाने तक सीमित रह गई है?

सामाजिक आइना: डरा हुआ नागरिक और बेखौफ अपराधी

​यह घटना हमारे समाज के गिरते स्तर को भी दर्शाती है। जहाँ एक ओर पीड़ित परिवार लखनऊ से काम छोड़कर अपनी जान बचाने घर भागता है, वहीं दूसरी ओर अपराधी खुलेआम फोन पर गालियाँ और जान से मारने की धमकियाँ दे रहा है। अगर एक अपराधी सरेआम घर में घुसकर पिस्तौल लहरा सकता है, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?

समीक्षा: यदि समय रहते बस्ती पुलिस ने इस ‘मुन्ना बाबा’ जैसे दबंगों पर नकेल नहीं कसी, तो यह प्रशासन की विफलता मानी जाएगी। न्याय केवल पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने से नहीं, बल्कि अपराधी को सलाखों के पीछे भेजने से मिलेगा। मुख्यमंत्री जी के ‘रामराज्य’ की कल्पना ऐसे बेलगाम गुंडों के रहते कभी साकार नहीं हो सकती।

 

  • बस्ती का ‘मुन्ना बाबा’: पुलिस से बेखौफ, कानून से ऊपर और धमकियों का सौदागर!
  • रामराज्य में रावण राज! घर में घुसकर महिलाओं को किया अपमानित, हाथ में पिस्तौल और जुबान पर ‘बोटी-बोटी’ काटने का जिक्र।
  • सावधान! मदद लेना मना है: यहाँ ₹2000 की मदद के बदले वसूली जा रही है जान, देखिए एक दबंग की सनक।
  • ​ पिस्तौल की नोक पर परिवार को बनाया बंधक—न्याय की आस में सहमा प्रार्थी।
  • खुली चुनौती: “जहाँ मिलेगा बोटी-बोटी काट देंगे”— बस्ती पुलिस को अपराधी का खुला चैलेंज, पीड़ित परिवार ने लगाई सुरक्षा की गुहार।

प्रशासन से अपील: अंबुज उपाध्याय और उनके परिवार के जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और आरोपी कृष्ण नंदन उपाध्याय पर तत्काल कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।

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